"डूबना अच्छा है पर खुद मे"
मेरे इंजीनियरिंग के दौरान मैंने एक subject पढ़ा था "Human Values and Professional Ethics" जो मुझे तब बिल्कुल भी समझ नहीं आया था | परन्तु उस subject मे एक शब्द था "Self-Exploration" जिसका हिंदी अर्थ होता है "खुद को जानो "| मेरी नासमझी के कारण शायद मैं इस शब्द को भी नहीं समझ पायी थी|
परन्तु आज जब सम्पूर्ण विश्व इस कोरोना नामक महामारी से संघर्षरत है तो मुझे लगता है कि यह सबसे उचित समय है इस शब्द को समझने का | मेरे विचार से खुद को जानने के लिए हमारा खुद के साथ रहना बहुत जरुरी है | हम सभी जीवन भर ना जाने कितने रिश्तों मे उलझे रहते है पर कभी खुद के साथ कोई रिश्ता नहीं बना पाते परन्तु क्यों ? थोड़ा आश्चर्यजनक कथन लगता है ना यह |
अगर आज इस आधुनिक और सभ्य समाज मे हमें कोई व्यक्ति खुद से बात करते हुए दिख जाता है तो हम उसके प्रति नकारात्मक विचारधारा बना लेते है पर क्यों ? खुद से बात करना कोई पाप है क्या ? किसी भी रिश्ते का आधार होता है संवाद | तो विषय जब खुद के साथ जुड़ने का आए तो खुद के साथ संवाद उसी प्रकार जरुरी है जिस प्रकार' जीवन मे ऑक्सीजन | और यदि किसी भी रिश्ते मे एक बार पूर्ण रूप से संवाद स्थापित हो जाता है तो वो रिश्ता अपना भविष्य खुद बना लेता है |
आज तक हम सभी ने ना जाने कितने रिश्ते जाने -अनजाने बनाए होंगे और ना जाने उन रिश्तो को निभाने मे कितना संघर्ष किया होगा पर फिर भी अंतता यह रिश्ते हमें निराशा ही देते हैं | आज जब हम सभी nationwide lock-down के कारण अपने busy schedule से थोड़ा दूर है तो क्यों ना इस समय मे खुद के साथ एक संवाद स्थापित कर अपने जीवन के सबसे मधुर रिश्ते जन्म दिया जाए और यकीनन यह रिश्ता आपको कभी निराश नहीं करेगा | यह खुद के साथ खुद का रिश्ता ही आपको अपने आप से मिला देगा |
सुरभि गुप्ता