Monday, March 30, 2020


मनमीत कौन?




आमतौर पर हम सबने अपने जन्म से ही सुना होता है कि  मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है जिसे जीवन व्यतीत करने के लिए जीवन के हर पड़ाव पर किसी ना किसी रिश्ते की जरुरत होती है |  यह  रिश्ते हमारी मूलभूत' आवशयकता होते है| ना केवल यह हमारी जरुरत होते है अपितु जीवन भर हमारा पोषण और रक्षण भी करते है|  
पर प्रश्न यह है कि क्या यह सभी रिश्ते हमारे मनमीत होते है इसका उत्तर  है  नहीं| यह उत्तर मन मे द्वन्द उत्पन्न करता है कि जो  रिश्ते हमारा जीवन भर पोषण करते है वो मनमीत क्यों नहीं होते | और यदि यह रिश्ते मनमीत नहीं होते तो मनमीत कौन होते है | 

सर्वप्रथम हमें यह जानना होगा कि मनमीत आखिर होते  कौन है ? किस दुनिया मे पाए जाते हैं इस प्रजाति  लोग ? तो इसका उत्तर बहुत ही साधारण है मनमीत वही जो मन पढ़ ले | शब्दो की इस कोलाहल भरी दुनिया मे जो आपकी ख़ामोशी पढ़ ले वह व्यक्ति है मनमीत | जो समक्ष है वह सब देखते है पर सच्चा मनमीत वही जो आपके उस रूप को पहचानता हो जिसे आपके कोई ना जानता हो| 

साथ चलने वाला साथी हो सकता है पर मनमीत नहीं|  मनमीत तो वह  जो आपके नेत्र मे छुपे अश्रु को पहचान सके, जो आपके चेहरे के बसंत और पतघड को भली- भाँति समझ सके| यह मनमीत आपके जीवन का कोई  भी रिश्ता हो सकता है आपके माता -पिता, आपके गुरुजन, आपके मित्र, या कोई और| व्यक्ति या रिश्ता कोई भी परन्तु बंधन अटूट होना चाहिए आपके साथ | 

तो खोजिये अपने मनमीत को और समय रहते अपने संबंध को और प्रगाढ़ बना लीजिये क्युकि जीवन  का क्या पता कल हो ना हो | 


"इस भीड़ भरी दुनिया मे, मनमीत कहाँ पाती हूँ ?"


                                                                                                                                   सुरभि गुप्ता 

Tuesday, March 24, 2020

"महत्व हर किसी का "

कुछ दिन पूर्ब अपने कॉलेज के सीनियर फैकल्टी से  वार्तालाप के  दौरान मैंने पाया  की मेरे  जीवन के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति मेरे पिता है | बात का अंत सिर्फ इतना ही नहीं था  कि मेरे पिता मेरे लिए सब कुछ है अपितु यह भी था कि वह मेरे द्वारा अर्जित की गयी हर उपलब्धि का श्रेय उनको जाता है | मुघे कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है अपने माता- पिता को श्रेय देने मैं अपुति सारा श्रेय उनको देने मैं आपत्ति है | 

हमारा जीवन एक वृक्ष की भांति है | जिस प्रकार एक वृक्ष का  जीवन  सर्व्प्रथम एक बीज से प्रारम्भ होकर अपने विशालकाय रूप को प्राप्त होता है | परन्तु प्रश्न ये है कि क्या सिर्फ बीज ही आवश्यक है वृक्ष निर्माण मे |  हवा, पानी, खाद का कोई मोल नहीं उस वृक्ष  के जीवन मे | तो इसका उत्तर है नहीं| एक वृक्ष निर्माण मे हवा, पानी, तथा उचित वातावरण का भी उतना ही महत्व है जितना की एक बीज का | उसी प्रकार एक मनुष्य बीज की भांति होता है जिसे जन्म उसके माता -पिता देते हैं  परन्तु उसका पोषण यह पूर्ण समाज करता है | कभी उसका मित्र बनकर, कभी उसका शिक्षक बनकर या कभी उसके संबंधी बनकर | 

तो सभी को महत्व दीजिये क्युकी आपके जीवन मे हर उस व्यक्ति का महत्व है  जो आपके जीवन मे और जिसके आपको पोषित किया एक विराट वृक्ष बनने मे | 


"A big thank you to my parents, my family, my teachers, and friends who made me what I am today. "

Friday, March 20, 2020

                                                           आदर्शवाद और इंसान  आदर्शवाद एक ऐसा शब्द है जिसकी परिभाषा हमें सदा से ही किस...