कुछ दिन पूर्ब अपने कॉलेज के सीनियर फैकल्टी से वार्तालाप के दौरान मैंने पाया की मेरे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति मेरे पिता है | बात का अंत सिर्फ इतना ही नहीं था कि मेरे पिता मेरे लिए सब कुछ है अपितु यह भी था कि वह मेरे द्वारा अर्जित की गयी हर उपलब्धि का श्रेय उनको जाता है | मुघे कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है अपने माता- पिता को श्रेय देने मैं अपुति सारा श्रेय उनको देने मैं आपत्ति है |
हमारा जीवन एक वृक्ष की भांति है | जिस प्रकार एक वृक्ष का जीवन सर्व्प्रथम एक बीज से प्रारम्भ होकर अपने विशालकाय रूप को प्राप्त होता है | परन्तु प्रश्न ये है कि क्या सिर्फ बीज ही आवश्यक है वृक्ष निर्माण मे | हवा, पानी, खाद का कोई मोल नहीं उस वृक्ष के जीवन मे | तो इसका उत्तर है नहीं| एक वृक्ष निर्माण मे हवा, पानी, तथा उचित वातावरण का भी उतना ही महत्व है जितना की एक बीज का | उसी प्रकार एक मनुष्य बीज की भांति होता है जिसे जन्म उसके माता -पिता देते हैं परन्तु उसका पोषण यह पूर्ण समाज करता है | कभी उसका मित्र बनकर, कभी उसका शिक्षक बनकर या कभी उसके संबंधी बनकर |
हमारा जीवन एक वृक्ष की भांति है | जिस प्रकार एक वृक्ष का जीवन सर्व्प्रथम एक बीज से प्रारम्भ होकर अपने विशालकाय रूप को प्राप्त होता है | परन्तु प्रश्न ये है कि क्या सिर्फ बीज ही आवश्यक है वृक्ष निर्माण मे | हवा, पानी, खाद का कोई मोल नहीं उस वृक्ष के जीवन मे | तो इसका उत्तर है नहीं| एक वृक्ष निर्माण मे हवा, पानी, तथा उचित वातावरण का भी उतना ही महत्व है जितना की एक बीज का | उसी प्रकार एक मनुष्य बीज की भांति होता है जिसे जन्म उसके माता -पिता देते हैं परन्तु उसका पोषण यह पूर्ण समाज करता है | कभी उसका मित्र बनकर, कभी उसका शिक्षक बनकर या कभी उसके संबंधी बनकर |
तो सभी को महत्व दीजिये क्युकी आपके जीवन मे हर उस व्यक्ति का महत्व है जो आपके जीवन मे और जिसके आपको पोषित किया एक विराट वृक्ष बनने मे |
"A big thank you to my parents, my family, my teachers, and friends who made me what I am today. "
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