Thursday, May 7, 2020

 किताबे जीवन-सारथी ही  होती हैं 


अभी कुछ दिनों पहले मेरी  एक friend का message आया कि lock-down मे time pass करना बहुत मुश्किल हो रहा है|  तो बड़ी ही सहजता से जबाब मे मैंने  कहा की  कुछ पढ़ लो जिस पर उसने बड़ी ही आपत्ति के साथ कहा की मेरी पढाई पूरी हो चुकी है और अब आगे पढ़ने का मेरा कोई विचार नहीं है | 

कितनी अजीब विचारधारा है  ना हम सब मे से एक बड़ा वर्ग अपने जीवन मे किताबो को बस अपनी स्कूली  शिक्षा  तक ही सीमित देता है |  पर क्यों ? इसका एक बहुत बड़ा कारण यह भी है कि हमे ऐसा लगता है कि किताबे बस स्कूली  शिक्षा ही देने मे समर्थ है | यह मानना और सोचना दोनों ही पूर्ण रूप से गलत है क्योकि किताबे ना केवल स्कूली  शिक्षा देने मे समर्थ है अपितु जीवन शिक्षा देने मे भी उतनी ही सक्षम है |  यह किताबे किसी भी प्रकार की हो सकती है जैसे किसी प्रतियोगी परीक्षा की कोई किताब या कोई उपनन्यास या फिर कोई रेसिपी बुक | 

अब सवाल यह भी सकता है कि किताबो को इतनी महत्ता आखिर दी ही क्यों जाए | क्योकि किताबे हमारे जीवन मे सारथी की ही तरह होती है जो हमारे ज्ञान को बड़ाकर इस जीवन'के रथ को चलाने मे हमारी मदद करती हैं | ना केवल जीवन रथ चलाने मे हमारी मदद करती है बल्कि decision making मे भी हमारी मदद करती है |  अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप किस तरह की किताबो का चयन करते है अपना जीवन सारथी बनाने के लिए | किताबो का चयन भी अहम् भूमिका रखता है क्योकि जैसा जीवन सारथी होगा जीवन भी अंतत वैसा ही होगा | 

तो बिना वक्त गवाए उठा लीजिए कोई किताब अपनी रूचि अनुरूप और बना लीजिए उसे अपना जीवन सारथी| क्योकि जितनी भूमिका जीवन मे जीवनसाथी की होती है उतनी ही महत्ता जीवनसारथी की भी होती है | 


सुरभि गुप्ता 










11 comments:

  1. Kitabein Jeevan saarthi hi hain,🙂well said

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  2. आपके जीवन की वास्तविकता को अपने उजागर किया है, बहुत ही सुंदर लेख

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  3. Truly said, we learn so many things from books. Nice thoughts.

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  4. बहुत सुन्दर👍👍

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  5. Great thinking as rightly said books are the best friend of a human

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