Wednesday, May 20, 2020

 अंतता प्रेम तो हम खुद से ही करते हैं 




मेरी एक बहुत अच्छी दोस्त है जो शायद मेरी पहली ऐसी हमउम्र मित्र है जिसके साथ मेरे विचार पूर्णता मिलते है | अभी कुछ दिनों से मोहतरमा अपने करियर और परिवार को लेकर थोड़ा परेशान थी कल अचानक उन से बात हुई तो उन्होंने बताया कि अब उन्हें  उनकी समस्याओ का समाधान मिल चूका है तो  मैंने जिज्ञासावश पूछ लिया कि  क्या समाधान मिला तो वह बोलीं  कि यदि जीवन मे करियर बनाने के बाद कुछ बन पायी तो परिवार को गर्ब होगा मुझ पर | मैंने भी अपनी सहमति व्यक्त की परन्तु एक तंज के साथ कि चुना तो आपने खुद को ही | अब वह मित्र ठहरी तो कुछ बोल भी नहीं सकती | 

सत्य यह ही है कि जब चुनाब अपने या अपनों मे से किसी एक का करना होता है तो प्रत्येक व्यक्ति खुद को ही चुनता है | कितनी विडम्वना है ना प्रेम हम खुद से करते है परन्तु ताउम्र ना जाने कितने रिश्तों को भ्रम मे रखते हैं कि हम उनसे प्रेम करतें हैं | और यदि मोहवश कोई व्यक्ति अपनी जगह अपने अपनों का चुनाब करता है तो वह उस रिश्ते मे भी अपने लिए ही प्रेम ढूढ़ता है | यदि वह व्यक्ति प्रेम पाने मे असमर्थ रहता है तो स्वतः वह खुद अपने सम्बन्ध को तोड़  देता है | और खुद से प्रेम करना कोई अपराध नहीं बल्कि जो व्यक्ति खुद से प्रेम नहीं कर सकता वह हमेशा दूसरों को प्रेम देने मे असमर्थ ही रहेगा | 



सुरभि गुप्ता 




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