ढलता सूरज और सृजन
मुझे हमेशा से ढलते सूरज को देखना बहुत पसंद है और हैरानी भी होती है कि कैसे वो दिन भर की तपन को अपने अंदर समेट कर भी इतना शांत रह लेता है | और ना केवल शांत रहता है बल्कि दुनिया की किसी भी सुन्दर वस्तु से भी अधिक सुन्दर दिखता है | फिर एकाएक अपनी सारी सुंदरता को अपनी बाहों मे समेटता हुआ शांत होने लगता है एक नयी यात्रा पर जाने के लिए |
अब यात्रा है तो कहीं तो अंत होगा ही और अंत हमेशा आरम्भ ही लाता है| इस यात्रा का अंत होता है सृजन | पर क्या सृजन इतना आसान होता है नहीं | सृजन तक पहुँचने के लिए सूरज को गुजरना पड़ता है एक काली गहरी रात से| पर ये रात चाँद और उसकी चाँदनी से भरी ना होकर पूरणतय लबालब भरी होती है संघर्ष और कभी ना हारने वाले जुनून से | यह संघर्ष ना जाने कितने सपनों और उम्मीदों का आधार होता है और जिस वक्त यह संघर्ष अपनी पराकाष्ठा पर होता है उसी समय सृजन जन्म लेता है|यही सृजन लाता है एक नया सूरज जो भरा होता है नए कल से |
तो यदि कभी जीवन की तपन सताए, ढल जाइए सूरज की तरह सृजन की यात्रा पर | और याद रखिए यात्रा कहीं ना कहीं पहुँचाती जरूर है |
ढलता सूरज देता है पैगाम नया
हर बार सृजन का बीज नया वो लाएगा ||
सुरभि गुप्ता
Motivational....Thanks for writing.
ReplyDeleteBehtreen likha hai aapne,Yatra kbhi khtm nhi hoti,
ReplyDeleteBehtreen likha hai aapne,Yatra kbhi khtm nhi hoti,
ReplyDeleteLovely writing.. Keep it up.. God bless you!!
ReplyDeleteBahut achhhaaa....
ReplyDeleteNice mam 👏👏👏👏👏
ReplyDeleteVery beautiful and motivational writing ♥️
ReplyDeleteYou are very creative Surbhi. I feel proud on you. These words has deeper meaning and I just love reading your blog. Best thing is it is not very detailed and yet interesting.
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteMotivational....
ReplyDeleteअति उत्तम
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